अंतरराष्ट्रीय व्यापार क्या है, इसके प्रकार, लाभ और हानि – (International Business)

आज के इस आर्टिकल की मदत से हम जानने वाले है के, अंतरराष्ट्रीय व्यापार क्या है (what is international business in Hindi) और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के प्रकार के बारेमे। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लाभ और हानि के ऊपर भी हम इसी आर्टिकल पर चर्चा करने वाले है। 

अंतरराष्ट्रीय व्यापार क्या है
International business क्या है ?

किसी एक ही देश की भौगोलिक सीमाओं के अंदर विभिन्न क्षैत्रों, स्थानों या प्रदेशों में होने वाला व्यापार “घरेलू या आंतरिक व्यापार” कहलाता है।

और इसके विपरित पूरी विश्व में मौजुद दो या दो से अधिक देशों के बीच होने वाला व्यापार “अंतरराष्ट्रीय या विदेशी व्यापार” कहलाता है।

जब किसी देश की छोटी से बड़ी वस्तुओं एवं सेवाओं का क्रय-विक्रय एक देश से दूसरे देश में जल, थल तथा वायु मार्गों के द्वारा होता है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार कहा जाता है।

चलिए इस आर्टिकल में हम इस अंतरराष्ट्रीय व्यापार को पूरी तरह समझने की कोशिश करते हैं, जैसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार का मतलब क्या है और इसके के प्रकार क्या है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लाभ और हानि क्या है, आदि।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार क्या है – International business meaning in Hindi

इस व्यापार को दो या दो से अधिक देशों की एक विनिमय प्रक्रिया के रूप में समझा जा सकता है, जो इसमें शामिल दो देशों के आपसी समझौते के आधार पर होती है।

विश्व का कोई भी देश सभी वस्तुओं और अपनी सभी आवश्यकताओं का उत्पादन करने में सक्षम नही होता हैं, अत: सभी देशों को अन्य देशों से सहायता लेनी पड़ती है।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार में विभिन्न देशों के मध्य अलग-अलग वस्तुओं व सेवाओं का आयात व निर्यात किया जाता है, और इसी प्रक्रिया को अंतरराष्ट्रीय व्यापार कहा जाता है।

कई बार किसी देश में कुछ जरूरतों को पूरा नही किया जा सकता हैं, और इसके लिए प्राकृतिक संसाधनों, मानव संसाधनों, पूंजी या कौशल की सीमाओं इसका कारण हो सकते हैं। लेकिन इस व्यापार से उसी जरूरत को भी पूरा किया जा सकता है।

उदाहरण के द्वारा समझा जाए तो,

भारत एक कृषि प्रधान देश हैं, और दूसरी तरफ साऊदी अरब देश के पास बहुत-सारा तेल हैं।

तो भारत देश एक समझौते के आधार पर कुछ कृषि खाद्य पदार्थ साऊदी अरब को देगा, और बदले में साऊदी अरब भारत को तेल देगा।

इस तरह एक समझौते पर आयात व निर्यात किया जाता है।

भारत इसके अलावा भी कई वस्तुएं अन्य देशों से आयात करता है, और बदले में उन्हे हमारे देश की वस्तुएं देता (निर्यात) है।

इस तरह यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार बहुत सारे देशों के मध्य होता है।

यह व्यापार न केवल वस्तुओं और सेवाओं का है, बल्कि पूंजी, कर्मियों, प्रौद्योगिकी और बौद्धिक संपदाओं जैसे पेटेंट, ट्रैडमार्क, नोव्होह और कॉपीराइट आदि से संबंधित भी हैं। यह लेन-देन विभिन्न रूप में किया जाता है, जो अक्सर समझौते के आधार पर परस्पर जुड़े हुए होते है।

नोट: आप अब तक यह जान चुके होंगे कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार क्या है ? लेकिन हम इस व्यवसाय में कैसे आ सकते हैं और कैसे बिजनेसमैन बन सकते हैं ? चलिए इसके बारे में भी थोड़ा जान लेते हैं।

International Business Management

आज सभी देशों में इंटरनेशन बिजनेस के लिए कोर्स करवाये जाते हैं, ताकि दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं को नयी पीढ़ी समझ सके।

आज भारत देश चीन, जापान और कई अन्य देशों के साथ ट्रे़ड रिलेशंस और मौद्रिक सहायता के मामले में एक दूसरे से जुड़ा हुआ है।

आप इन सभी के बारे में विस्तार से पढ़ सकते है।

इंटरनेशन बिजनेस के कोर्स के लिए आपको निम्नलिखित डिग्रीयां हासिल करनी होगी।

  • अंडर ग्रेजुएट डिग्री – B.B.A या B.B.M
  • पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री – MBA in IB या MIB
  • डाक्टरेट डिग्री – Ph.D.

इसके बाद कैंडिडेट को एग्जाम्स क्लिअर करने होंगे।

आप इस व्यवसाय को अच्छे से समझने के लिए एमबीए का कोर्स कर सकते है। International Business के लिए निम्नलिखित एग्जामस होते हैं –

  • अंडर-ग्रेजुएट डिग्री (NMT, GGSIPU CET, DU JET, SAT)
  • पोस्ट ग्रेजुए डिग्री (CAT, JET, CMAT, IIFT, SNAP)
  • डाक्टरेट डिग्री (डिपार्टमेंट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज आईआईटी दिल्ली एंट्रेस एग्जाम etc.)

अब हम जानेंगे कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के प्रकार कितने होते हैं, और साथ ही हम यह भी जानेंगे कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लाभ और हानि क्या हैं?

अंतरराष्ट्रीय व्यापार के प्रकार

वैसे तो दो या दो से अधिक देशों के मध्य कई तरह के समझौते के आधार पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार किया जाता हैं।

लेकिन हम यहां पर कुछ विशिष्ट अंतरराष्ट्रीय व्यापार के प्रकार के बारे में जानेंगे, जो निम्नलिखित हैं।

आयात और निर्यात

यह विश्व की सबसे सरलत्म और सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली विधि हैं।

इस व्यापार विधि को अंतर्राष्ट्रिय व्यापार की नींव माना जाता है, क्योंकि यह एक न्यायपूर्व विधि भी है।

आयात व निर्यात व्यवसाय का मतलब ऐसे व्यवसाय से हैं, जिसमें क्रमश: वस्तुओं या सेवाओं को देश के लिए खरिदा और देश से बेचा जाता है।

आयात अन्य देशों से वस्तुएं खरिदना।

निर्यात – स्वयं के देश की वस्तुओं को अन्य देशों को बेचना।

लाइसेंसिंग

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लाइसेंसिंग भी एक सबसे असान तरिका माना जाता है।

वर्तमान में कई कंपनीयों के पास स्वामित्व अधिकार के साथ एक मानकीकृत उत्पाद होता है, जिसे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बेचने के लिए लाइसेंस की जरूरत होती है।

और इस लाइसेंस के कई रूप होते हैं, जैसे पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रैडमार्क आदि। 

लाइसेंसिंग विधि से किताबें और फिल्में जैसे उत्पादों का देश-विदेशों में व्यापार किया जाता हैं।

फ्रेंचाइजिंग व्यापार

फ्रेंचाइजिंग व्यापार राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर व्यवसाय के विस्तार के लिए बहुत ही प्रभावी तरिका है, हालांकि फ्रेंचाइजिंग भी लाइसेंसिंग की तरह ही है।

इस व्यापार में एक मूल कंपनी अन्य कंपनी कों मूल कंपनी के नाम/ब्रांड और उत्पादों का प्रयोग करने का अधिकार देता है।

मतलब मूल कंपनी फ्रेंचाइजी बन जाती है और उत्पादों का उपयोग करने वाली कंपनी भी फ्रेंचाइजी बन जाती है।

दुनिया की कई कंपनीयां अतर्राष्ट्रीय स्तर पर फ्रेंचाइजी मॉडल का उपयोग करती हैं।

उदाहरण – मैकडॉनल्ड्स, स्टारबक्स, डोमिनोज पिज्जा, पिज्जा हट और कई अन्य।

संयुक्त उद्यम और सामरिक भागीदार

इस तरह के व्यापार में दो पक्षों के बीच एक अनुबंध होता है, मतलब इसमें एक अंतर्राष्ट्रीय कंपनी और दूसरी स्थानीय कंपनी होती है।

ये दोनों कंपनीयां इक्विटी और प्रोफिट-शेयरिंग का प्रतिशत पारस्परिक रूप से तय करती हैं।

इस व्यापार में सामरिक भागीदारी भी होती है, लेकिन इसके लिए दोनों पक्षों के पास विशेष पेशकश होनी चाहिए।

उदाहरण के लिए एक स्थानीय कंपनी के पास देश के भीतर ब्रांड का नाम और नटवर्क होता है, जबकि अंतर्राष्ट्रीय कंपनी के पास उन्नत तकनीक होती है।

अब दोनों ही मिलकर प्रोडक्ट बनाते है और उन्हे बेचकर प्रोफिट शेयर कर लेते है।

उदाहरण – भारत में टाटा जगुआर सहयोगी कंपनीयां है।

बहुराष्ट्रीय कंपनीयां

कई कंपनीयां ऐसी होती है, जो एक से अधिक उत्पादों का निर्माण करती हैं, और विदेशों में उनका व्यापार करती हैं।

उदाहरण – Amazon, Citigroup, Coca-cola आदि।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश

इस व्यापार में एक देश की कंपनी विदेश की कंपनी में व्यावसायिक हीत के लिए निवेश करती है।

यह व्यापार आमतौर पर पूंजी निवेश का होता है।

इस तरह देश-विदेश में कई प्रकार के अंतरराष्ट्रीय व्यापार होते हैं।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लाभ और हानि

इस अंतरराष्ट्रीय व्यापार के हानि और लाभ दोनों ही हैं, जैसे-

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की प्रमुख लाभ

  • इससे श्रम विभाजन होता है, जिससे कुल विश्व उत्पादन अधिकतम होता है।
  • देश के संसाधनों का पूर्ण उपयोग और राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है।
  • इस व्यापार में प्रतिस्पर्धा विश्व के साथ होती है, जिससे उत्पादन कुशलता में वृद्धि होती है।
  • ऐसे व्यापारिक संबंध से संकटकाल में सहायता आसानी से मिलती है।
  • विदेशों में वस्तुओं को बेचने के लिए उत्पादन बढ़ता है और इससे रोजगार तथा आय में भी वृद्धि होती है।
  • इस व्यवसाय से एकाधिकारी व्यावसाय नही बन सकते है।
  • उपभोक्ताओं को अच्छी व सस्ती वस्तुओं और मनचाही वस्तुओं के उपयोग का लाभ मिलता है। 
  • इस व्यापार से देश की वस्तुओं के मुल्यों में समानता आती है।
  • इससे देश की जरूरतों के सामान का आयात किया जा सकता है।

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की प्रमुख हानियां

  • इस व्यवसाय से कई बार एक देश दूसरे देश पर कुछ वस्तुओं के लिए पूरी तरह निर्भर हो जाता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के कारण कच्चे माल का अधिक उपयोग होने लगता है और इससे कोयला, पेट्रोल तथा अन्य खनिज पदार्थ समाप्त हो रहे है।
  • विदेशी व्यापार से प्रतियोगिता काफी बढ़ती जा रही है और इस प्रतियोगिता में अल्पविकसित देश टिक नही पाते हैं।
  • कई बार यह व्यापार अंतर्राष्ट्रीय द्वेष और युद्ध का आधार बन जाता है।
  • ऐसे व्यापार के कारण देश सिर्फ अधिक लाभ देने वाली उद्योग पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करता है, जिससे देश का एकांगी विकास होता है।
  • इस व्यापार में कई विकसित देश पिछड़े देशों में अपने उत्पाद काफी कम मूल्य पर बेचते है, जिससे पिछड़े देश के उद्योग-धंधे ठप हो जाते है।
  • ऐसे व्यापार से कृषि प्रधान और लघु कुटिर उद्योग को काफी हानि उठानी पड़ती है।

अंतिम बात,

तो दोस्तों, आज के इस आर्टिकल के जरिये हमने जाना के “अंतरराष्ट्रीय व्यापार क्या है (what is international business in Hindi)” इसके बारेमे जाना।

इसके अलावा, हमने इस तरह के बिजनेस के कुछ प्रकार और लाभ और नुक्सान के बारेमे भी बात की। 

तो दोस्तों, उम्मीद करता हूँ के आजका ये आर्टिकल आपको जरूर पसंद आया होगा।

अगर आर्टिकल सही में आपको पसंद आता है तो इसे सोशल मीडिया पर जरूर से शेयर करे।

इसके अलावा, इंटरनेशनल बिज़नेस (International Business) से सम्बंधित कोई सवाल या सुझाव हो तो हमे निचे कमेंट कर जरूर बताए।

 

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